सगुन सुगंध न जाहिं बखानी
सगुन सुगंध न जाहिं बखानी
चौपाई ४, दोहा ३४६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सगुन सुगंध न जाहिं बखानी। मंगल सकल सजहिं सब रानी॥ रचीं आरतीं बहुत बिधाना। मुदित करहिं कल मंगल गाना॥ ४ ॥
अर्थ
शकुन की सुगन्धित वस्तुएँ बखानी नहीं जा सकतीं। सब रानियाँ सम्पूर्ण मंगल-साज सजा रही हैं। बहुत प्रकार की आरतियाँ बनाकर वे आनन्दित होकर सुन्दर मंगल-गान कर रही हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना