साधु समाज संग महिदेवा

चौपाई ३, दोहा ३१५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा॥ सोहत साथ सुभग सुत चारी। जनु अपबरग सकल तनुधारी॥ ३ ॥

अर्थ

उनके साथ साधु समाज और ब्राह्मणों की मण्डली ऐसी शोभा दे रही है, मानो तन धारण किए हुए सुख सेवा कर रहे हों। चारों सुन्दर पुत्र साथ में ऐसे सुशोभित हैं, मानो सम्पूर्ण मोक्ष (सालोक्य, सामीप्य, सारूप्य, सायुज्य) शरीर धारण किए हुए हों।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत