सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि
सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि
चौपाई ३, दोहा २०८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाईं॥ कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा॥ ३ ॥
अर्थ
सभी पुत्र मुझे प्राणों के समान प्यारे हैं; उनमें भी हे प्रभो! राम को तो [किसी प्रकार भी] देना नहीं बनता। कहाँ अत्यन्त डरावने और क्रूर राक्षस और कहाँ सुन्दर, परम किशोर अवस्था के (बिलकुल सुकुमार) मेरे पुत्र!
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र द्वारा यज्ञ-रक्षा हेतु राम-लक्ष्मण को माँगने और दशरथ द्वारा वशिष्ठ की सम्मति से उन्हें भेजने का वर्णन है।
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विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना