सब लच्छन संपन्न कुमारी
सब लच्छन संपन्न कुमारी
चौपाई २, दोहा ६७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सब लच्छन संपन्न कुमारी। होइहि संतत पियहि पिआरी॥ सदा अचल एहि कर अहिवाता। एहि तें जसु पैहहिं पितु माता॥ २ ॥
अर्थ
कन्या सब सुलक्षणों से सम्पन्न है, यह अपने पति को सदा प्यारी होगी। इसका सुहाग सदा अचल रहेगा और इससे इसके माता-पिता यश पावेंगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।
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पार्वती का जन्म और तपस्या