सब बिधि सबहि समदि नरनाहू
सब बिधि सबहि समदि नरनाहू
चौपाई १, दोहा ३५४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सब बिधि सबहि समदि नरनाहू। रहा हृदयँ भरि पूरि उछाहू॥ जहँ रनिवासु तहाँ पगु धारे। सहित बहूटिन्ह कुअँर निहारे॥ १ ॥
अर्थ
सब प्रकार से सबका समादर कर लेने पर राजा दशरथजी के हृदय में पूर्ण उत्साह भर गया। जहाँ रनिवास था, वहाँ वे पधारे और बहुओं समेत उन्होंने कुमारों को देखा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना