राउ तृषित नहिं सो पहिचाना
राउ तृषित नहिं सो पहिचाना
चौपाई ४, दोहा १५८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
राउ तृषित नहिं सो पहिचाना। देखि सुबेष महामुनि जाना॥ उतरि तुरग तें कीन्ह प्रनामा। परम चतुर न कहेउ निज नामा॥ ४ ॥
अर्थ
राजा प्यासा होने के कारण [व्याकुलता में] उसे पहचान न सका। सुन्दर वेष देखकर राजा ने उसे महामुनि समझा और घोड़े से उतरकर उसे प्रणाम किया। परन्तु बड़ा चतुर होने के कारण राजा ने उसे अपना नाम नहीं बतलाया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा