रति गवनी सुनि संकर बानी

चौपाई २, दोहा ८८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

रति गवनी सुनि संकर बानी। कथा अपर अब कहउँ बखानी॥ देवन्ह समाचार सब पाए। ब्रह्मादिक बैकुंठ सिधाए॥ २ ॥

अर्थ

शिवजी के वचन सुनकर रति चली गयी। अब दूसरी कथा कहता हूँ। देवताओं ने यह सब समाचार पाए, तो ब्रह्मादि वैकुण्ठ चले गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रति को वरदान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रति के विलाप पर शिव द्वारा कामदेव के पुनर्जन्म का वरदान और दिव्य करुणा का वर्णन है।

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रति को वरदान