रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि
रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि
दोहा ३०९ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज। जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज॥ ३०९ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी और सीताजी सुन्दरताकी सीमा हैं और दोनों राजा पुण्य की सीमा हैं, जहाँ-तहाँ जनकपुरवासी स्त्री-पुरुषों का समूह इकट्ठे हो-होकर यही कह रहे हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का दोहा ३०९ है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत