रामकथा कलि कामद गाई
रामकथा कलि कामद गाई
चौपाई ४, दोहा ३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रामकथा कलि कामद गाई। सुजन सजीवनि मूरि सुहाई॥ सोइ बसुधातल सुधा तरंगिनि। भय भंजनि भ्रम भेक भुअंगिनि॥ ४ ॥
अर्थ
यह रामकथा कलियुग में सब मनोरथों को पूर्ण करनेवाली कामधेनु गौ है और सज्जनों के लिये सुन्दर संजीवनी जड़ी है। पृथ्वी पर यही अमृत की नदी है, जन्म-मरणरूपी भय का नाश करनेवाली और भ्रमरूपी मेढकों को खाने के लिये सर्पिणी है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा