बुध बिश्राम सकल जन रंजनि

चौपाई ३, दोहा ३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बुध बिश्राम सकल जन रंजनि। रामकथा कलि कलुष बिभंजनि॥ रामकथा कलि पंनग भरनी। पुनि बिबेक पावक कहुँ अरनी॥ ३ ॥

अर्थ

रामकथा पंडितों को विश्राम देनेवाली, सब मनुष्यों को प्रसन्न करनेवाली और कलियुग के पापों का नाश करनेवाली है। रामकथा कलियुगरूपी साँप के लिये मोरनी है और विवेकरूपी अग्नि के प्रकट करने के लिये अरणि (मंथन की जानेवाली लकड़ी) है, (अर्थात्‌ इस कथा से ज्ञान की प्राप्ति होती है)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।

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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा