रामहि लखनु बिलोकत कैसें
रामहि लखनु बिलोकत कैसें
चौपाई ४, दोहा २६३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रामहि लखनु बिलोकत कैसें। ससिहि चकोर किसोरकु जैसें॥ सतानंद तब आयसु दीन्हा। सीताँ गमनु राम पहिं कीन्हा॥ ४ ॥
अर्थ
श्रीरामजी को लक्ष्मणजी किस प्रकार देख रहे हैं, जैसे चन्द्रमा को चकोर का बच्चा देख रहा हो। तब शतानन्दजी ने आज्ञा दी और सीताजी ने श्रीरामजी के पास गमन किया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “धनुषभंग” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवधनुष-भंग और सभा में हर्षोल्लास का वर्णन है।
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धनुषभंग