राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं
राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं
चौपाई २, दोहा ३२५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं। जगमगात मनि खंभन माहीं॥ मनहुँ मदन रति धरि बहु रूपा। देखत राम बिआहु अनूपा॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरामजी और श्रीसीताजी की सुन्दर परछाईं मणियों के खम्भों में जगमगा रही हैं, मानो कामदेव और रति बहुत-से रूप धारण करके श्रीरामजी के अनुपम विवाह को देख रहे हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३२५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह