राम कृपा तें पारबति सपनेहुँ तव
राम कृपा तें पारबति सपनेहुँ तव
दोहा ११२ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
राम कृपा तें पारबति सपनेहुँ तव मन माहिं। सोक मोह संदेह भ्रम मम बिचार कछु नाहिं॥ ११२ ॥
अर्थ
हे पार्वती! मेरे विचार में तो श्रीरामजी की कृपा से तुम्हारे मन में स्वप्न में भी शोक, मोह, सन्देह और भ्रम कुछ भी नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का दोहा ११२ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद