राम अनुज मन की गति जानी
राम अनुज मन की गति जानी
चौपाई २, दोहा २१८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
राम अनुज मन की गति जानी। भगत बछलता हियँ हुलसानी॥ परम बिनीत सकुचि मुसुकाई। बोले गुर अनुसासन पाई॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने छोटे भाई के मन की दशा जान ली, तब उनके हृदय में भक्तवत्सलता उमड़ आयी। वे गुरु की आज्ञा पाकर बहुत ही विनय के साथ सकुचाते हुए मुसकराकर बोले—
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण के मनोहर रूप को देख जनकजी की प्रेममुग्धता और ब्रह्मसुख-विस्मृति का वर्णन है।
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राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध