पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई
पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई
चौपाई १, दोहा २२४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई। जहँ धनुमख हित भूमि बनाई॥ अति बिस्तार चारु गच ढारी। बिमल बेदिका रुचिर सँवारी॥ १ ॥
अर्थ
दोनों भाई नगर के पूरब ओर गये; जहाँ धनुषयज्ञ के लिये [रंग] भूमि बनायी गयी थी। बहुत लंबा-चौड़ा सुन्दर ढला हुआ पक्का आँगन था, जिस पर सुन्दर और निर्मल वेदी सजायी गयी थी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण