पुनि तिन्ह के गृह जेवँइ जोऊ

चौपाई ४, दोहा १६८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि तिन्ह के गृह जेवँइ जोऊ। तव बस होइ भूप सुनु सोऊ॥ जाइ उपाय रचहु नृप एहू। संबत भरि संकलप करेहू॥ ४ ॥

अर्थ

यही नहीं, उन (भोजन करनेवालों) के घर भी जो कोई भोजन करेगा, हे राजन्‌! सुनो, वह भी तुम्हारे अधीन हो जायगा। हे राजन्‌! जाकर यही उपाय करो और वर्षभर [भोजन कराने] का संकल्प कर लेना।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १६८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा