नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु
नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु
दोहा १६८ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु सहित परिवार। मैं तुम्हरे संकलप लगि दिनहिं करबि जेवनार॥ १६८ ॥
अर्थ
नित्य नये एक लाख ब्राह्मणों को कुटुम्ब सहित निमन्त्रित करना। मैं तुम्हारे संकल्प [के काल अर्थात् एक वर्ष] तक प्रतिदिन भोजन बना दिया करूँगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का दोहा १६८ है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा