पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा

चौपाई ३, दोहा ११० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा। बालचरित पुनि कहहु उदारा॥ कहहु जथा जानकी बिबाहीं। राज तजा सो दूषन काहीं॥ ३ ॥

अर्थ

फिर हे प्रभु! श्रीरामचन्द्रजी के अवतार (जन्म) की कथा कहिये तथा उनका उदार बालचरित्र कहिये। फिर जिस प्रकार उन्होंने श्रीजानकीजी से विवाह किया, वह कथा कहिये और फिर यह बतलाइये कि उन्होंने जो राज्य छोड़ा सो किस दोष से।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद