बन बसि कीन्हे चरित अपारा
बन बसि कीन्हे चरित अपारा
चौपाई ४, दोहा ११० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बन बसि कीन्हे चरित अपारा। कहहु नाथ जिमि रावन मारा॥ राज बैठि कीन्हीं बहु लीला। सकल कहहु संकर सुखसीला॥ ४ ॥
अर्थ
हे नाथ! फिर उन्होंने वन में रहकर जो अपार चरित्र किये तथा जिस तरह रावण को मारा, वह कहिये। हे सुखसील शंकर! फिर आप उन सारी लीलाओं को कहिये जो उन्होंने राज्य [सिंहासन] पर बैठकर की थीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद