पुनि मन बचन कर्म रघुनायक

चौपाई ५, दोहा १८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि मन बचन कर्म रघुनायक। चरन कमल बंदउँ सब लायक॥ राजिवनयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक॥ ५ ॥

अर्थ

फिर मैं मन, वचन और कर्म से कमलनयन, धनुष-बाणधारी, भक्तों की विपत्ति का नाश करने और उन्हें सुख देनेवाले भगवान् श्रीरघुनाथजी के सर्वसमर्थ चरणकमलों की वन्दना करता हूँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।

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सीताराम और परिकर वन्दना