प्रभु तोषेउ सुनि संकर बचना

चौपाई ३, दोहा ७७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रभु तोषेउ सुनि संकर बचना। भक्ति बिबेक धर्म जुत रचना॥ कह प्रभु हर तुम्हार पन रहेऊ। अब उर राखेहु जो हम कहेऊ॥ ३ ॥

अर्थ

शिवजी की भक्ति, विवेक और धर्म से युक्त वचन-रचना सुनकर प्रभु रामचन्द्रजी सन्तुष्ट हो गये। प्रभु ने कहा--हे हर! आपकी प्रतिज्ञा पूरी हो गयी। अब हमने जो कहा है उसे हृदय में रखना।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “राम का शिवजी से विवाह-अनुरोध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवजी को पार्वती से विवाह करने के अनुरोध और शिवजी की सहर्ष स्वीकृति का वर्णन है।

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राम का शिवजी से विवाह-अनुरोध