अंतरधान भए अस भाषी

चौपाई ४, दोहा ७७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अंतरधान भए अस भाषी। संकर सोइ मूरति उर राखी॥ तबहिं सप्तरिषि सिव पहिं आए। बोले प्रभु अति बचन सुहाए॥ ४ ॥

अर्थ

इस प्रकार कहकर श्रीरामचन्द्रजी अन्तर्धान हो गये। शिवजी ने उनकी वह मूर्ति अपने हृदय में रख ली। उसी समय सप्तर्षि शिवजी के पास आये। प्रभु महादेवजी ने उनसे अत्यन्त सुहावने वचन कहे--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “राम का शिवजी से विवाह-अनुरोध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवजी को पार्वती से विवाह करने के अनुरोध और शिवजी की सहर्ष स्वीकृति का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
राम का शिवजी से विवाह-अनुरोध