मातु पिता गुर प्रभु कै बानी
मातु पिता गुर प्रभु कै बानी
चौपाई २, दोहा ७७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मातु पिता गुर प्रभु कै बानी। बिनहिं बिचार करिअ सुभ जानी॥ तुम्ह सब भाँति परम हितकारी। अग्या सिर पर नाथ तुम्हारी॥ २ ॥
अर्थ
माता, पिता, गुरु और स्वामी की बात को बिना ही विचारे शुभ समझकर करना (मानना) चाहिये। फिर आप तो सब प्रकार से मेरे परम हितकारी हैं। हे नाथ! आपकी आज्ञा मेरे सिरपर है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राम का शिवजी से विवाह-अनुरोध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवजी को पार्वती से विवाह करने के अनुरोध और शिवजी की सहर्ष स्वीकृति का वर्णन है।
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राम का शिवजी से विवाह-अनुरोध