प्रात पुनीत काल प्रभु जागे
प्रात पुनीत काल प्रभु जागे
चौपाई ३, दोहा ३५८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रात पुनीत काल प्रभु जागे। अरुनचूड़ बर बोलन लागे॥ बंदि मागधन्हि गुनगन गाए। पुरजन द्वार जोहारन आए॥ ३ ॥
अर्थ
प्रातःकाल पवित्र ब्राह्ममुहूर्त में प्रभु जागे। मुर्गे सुन्दर बोलने लगे। भाट और मागधों ने गुणों का गान किया तथा नगर के लोग द्वार पर जोहार करने को आये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना