बंदि बिप्र सुर गुर पितु माता
बंदि बिप्र सुर गुर पितु माता
चौपाई ४, दोहा ३५८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बंदि बिप्र सुर गुर पितु माता। पाइ असीस मुदित सब भ्राता॥ जननिन्ह सादर बदन निहारे। भूपति संग द्वार पगु धारे॥ ४ ॥
अर्थ
ब्राह्मणों, देवताओं, गुरु, पिता और माताओं की वन्दना करके आशीर्वाद पाकर सब भाई प्रसन्न हुए। माताओं ने आदर के साथ उनके मुखों को देखा। फिर वे राजा के साथ दरवाजे पर पधारे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना