पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाईं

चौपाई ४, दोहा २४३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाईं। कुसुम कलीं बिच बीच बनाईं॥ रेखें रुचिर कंबु कल गीवाँ। जनु त्रिभुवन सुषमा की सीवाँ॥ ४ ॥

अर्थ

पीली चौकोनी टोपियाँ सिरों पर सुशोभित हैं, जिनके बीच-बीच में फूलों की कलियाँ बनायी हुई हैं। शंख के समान सुन्दर (गोल) गले में मनोहर तीन रेखाएँ हैं, जो मानो तीनों लोकों की सुन्दरताकी सीमा [को बता रही] हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।

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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश