पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही
पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही
चौपाई ३, दोहा ९१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही। गहि पद बिनय हिमाचल कीन्ही॥ जाइ बिधिहि दीन्हि सो पाती। बाचत प्रीति न हृदयँ समाती॥ ३ ॥
अर्थ
फिर हिमाचल ने वह लग्नपत्रिका सप्तर्षियों को दे दी और चरण पकड़कर उनकी विनती की। उन्होंने जाकर वह लग्नपत्रिका ब्रह्माजी को दी। उसको पढ़ते समय उनके हृदय में प्रेम समाता न था।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास