हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई
हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई
चौपाई २, दोहा ९१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई। सादर मुनिबर लिए बोलाई॥ सुदिनु सुनखतु सुघरी सोचाई। बेगि बेदबिधि लगन धराई॥ २ ॥
अर्थ
शिवजी के प्रभाव को मन में विचारकर हिमाचल ने श्रेष्ठ मुनियों को आदरपूर्वक बुला लिया और उनसे शुभ दिन, शुभ नक्षत्र और शुभ घड़ी सोचवाकर वेद की विधि के अनुसार शीघ्र ही लग्न धराई।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।
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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास