परसि जासु पद पंकज धूरी
परसि जासु पद पंकज धूरी
चौपाई ३, दोहा २२३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
परसि जासु पद पंकज धूरी। तरी अहल्या कृत अघ भूरी॥ सो कि रहिहि बिनु सिव धनु तोरें। यह प्रतीति परिहरिअ न भोरें॥ ३ ॥
अर्थ
जिनके चरणकमलों की धूलि का स्पर्श पाकर अहल्या तर गई, जिसने बड़ा भारी पाप किया था, वे क्या शिवजी का धनुष बिना तोड़े रहेंगे। इस विश्वास को भूलकर भी नहीं छोड़ना चाहिये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण