पंच कवल करि जेवन लागे
पंच कवल करि जेवन लागे
चौपाई १, दोहा ३२९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पंच कवल करि जेवन लागे। गारि गान सुनि अति अनुरागे॥ भाँति अनेक परे पकवाने। सुधा सरिस नहिं जाहिं बखाने॥ १ ॥
अर्थ
सब लोग पंचकौर करके (अर्थात् 'प्राणाय स्वाहा, अपानाय स्वाहा, व्यानाय स्वाहा, उदानाय स्वाहा और समानाय स्वाहा' इन मंत्रों का उच्चारण करते हुए पहले पाँच ग्रास लेकर) भोजन करने लगे। गाली का गाना सुनकर वे अत्यन्त प्रेममग्न हो गये। अनेक प्रकार के अमृत के समान (स्वादिष्ट) पकवान परोसे गये, जिनका बखान नहीं हो सकता।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह