नृप सब भाँति सबहि सनमानी

चौपाई ४, दोहा ३५५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

नृप सब भाँति सबहि सनमानी। कहि मृदु बचन बोलाईं रानी॥ बधू लरिकनीं पर घर आईं। राखेहु नयन पलक की नाईं॥ ४ ॥

अर्थ

राजा ने सबका सब प्रकार से सम्मान करके, कोमल वचन कहकर रानियों को बुलाया और कहा— बहुएँ छोटी बच्चियाँ हैं, पराये घर आई हैं। इनको इस तरह से रखना जैसे नेत्रों को पलकें रखती हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना