नित नूतन मंगल पुर माहीं
नित नूतन मंगल पुर माहीं
चौपाई १, दोहा ३३० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नित नूतन मंगल पुर माहीं। निमिष सरिस दिन जामिनि जाहीं॥ बड़े भोर भूपतिमनि जागे। जाचक गुन गन गावन लागे॥ १ ॥
अर्थ
जनकपुर में नित्य नये मंगल हो रहे हैं। दिन और रात पलक के समान बीत जाते हैं। बड़े भोर राजाओं के मुकुटमणि दशरथजी जागे। याचक उनके गुणसमूह का गान करने लगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह