देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता
देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता
चौपाई २, दोहा ३३० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता। किमि कहि जात मोदु मन जेता॥ प्रातक्रिया करि गे गुरु पाहीं। महा प्रमोदु प्रेमु मन माहीं॥ २ ॥
अर्थ
चारों कुमारों को सुन्दर वधुओं सहित देखकर उनके मन में जितना आनन्द है, वह किस प्रकार कहा जा सकता है? वे प्रातःक्रिया करके गुरु वसिष्ठजी के पास गये। उनके मन में महान् आनन्द और प्रेम भरा है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह