निरखि सहज सुंदर दोउ भाई
निरखि सहज सुंदर दोउ भाई
चौपाई २, दोहा २२० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
निरखि सहज सुंदर दोउ भाई। होहिं सुखी लोचन फल पाई॥ जुबतीं भवन झरोखन्हि लागीं। निरखहिं राम रूप अनुरागीं॥ २ ॥
अर्थ
स्वभाव ही से सुन्दर दोनों भाइयों को देखकर वे लोग नेत्रों का फल पाकर सुखी हो रहे हैं। युवती स्त्रियाँ घर के झरोखों से लगी हुई प्रेम सहित श्रीरामचन्द्रजी के रूप को देख रही हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण