नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज
नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज
सोरठा ३ · बालकाण्ड
सोरठा पाठ
नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन। करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन॥ ३ ॥
अर्थ
जो नील कमलके समान श्यामवर्ण हैं, पूर्ण खिले हुए लाल कमलके समान जिनके नेत्र हैं और जो सदा क्षीरसागरमें शयन करते हैं, वे भगवान् (नारायण) मेरे हृदयमें निवास करें।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का सोरठा ३ है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा सरस्वती, गणेश, भवानी-शंकर, गुरु और श्रीराम की वंदना एवं दिव्य कृपा की याचना का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
मंगलाचरण