कुंद इंदु सम देह उमा रमन
कुंद इंदु सम देह उमा रमन
सोरठा ४ · बालकाण्ड
सोरठा पाठ
कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन। जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन॥ ४ ॥
अर्थ
जिनका कुन्दके पुष्प और चन्द्रमाके समान (गौर) शरीर है, जो पार्वतीजीके प्रियतम और दयाके धाम हैं और जिनका दीनोंपर स्नेह है, वे कामदेवका मर्दन करनेवाले (शिवजी) मुझपर कृपा करें।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का सोरठा ४ है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा सरस्वती, गणेश, भवानी-शंकर, गुरु और श्रीराम की वंदना एवं दिव्य कृपा की याचना का वर्णन है।
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मंगलाचरण