मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर
मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर
सोरठा २ · बालकाण्ड
सोरठा पाठ
मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन॥ २ ॥
अर्थ
जिनकी कृपासे गूँगा बहुत सुन्दर बोलनेवाला हो जाता है और लँगड़ा-लूला दुर्गम पहाड़पर चढ़ जाता है, वे कलियुगके सब पापोंको जला डालनेवाले दयालु (भगवान्) मुझपर द्रवित हों (दया करें)।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का सोरठा २ है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा सरस्वती, गणेश, भवानी-शंकर, गुरु और श्रीराम की वंदना एवं दिव्य कृपा की याचना का वर्णन है।
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मंगलाचरण