नील सरोरुह नील मनि नील नीरधर

दोहा १४६ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

नील सरोरुह नील मनि नील नीरधर स्याम। लाजहिं तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम॥ १४६ ॥

अर्थ

भगवान् के नीले कमल, नीलमणि और नीले जलधर के समान [कोमल, प्रकाशमय और सरस] श्यामवर्ण [चिन्मय] शरीर की शोभा देखकर करोड़ों-करोड़ों कामदेव भी लजा जाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का दोहा १४६ है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान