दंपति बचन परम प्रिय लागे

चौपाई ४, दोहा १४६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

दंपति बचन परम प्रिय लागे। मृदुल बिनीत प्रेम रस पागे॥ भगत बछल प्रभु कृपानिधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना॥ ४ ॥

अर्थ

राजा-रानी के कोमल, विनययुक्त और प्रेमरस में पगे हुए वचन भगवान् को बहुत ही प्रिय लगे। भक्तवत्सल, कृपानिधान, समस्त विश्व के वासस्थान, सर्वसमर्थ भगवान् प्रकट हो गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान