निज गिरा पावनि करन कारन राम
निज गिरा पावनि करन कारन राम
छन्द, दोहा ३६१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
छन्द पाठ
निज गिरा पावनि करन कारन राम जसु तुलसीं कह्यो। रघुबीर चरित अपार बारिधि पारु कबि कौनें लह्यो॥ उपबीत ब्याह उछाह मंगल सुनि जे सादर गावहीं। बैदेहि राम प्रसाद ते जन सर्बदा सुखु पावहीं॥
अर्थ
अपनी वाणी को पवित्र करने के लिये तुलसी ने राम का यश कहा है। [नहीं तो] श्रीरघुनाथजी का चरित्र अपार समुद्र है, किस कवि ने उसका पार पाया है? जो लोग यज्ञोपवीत और विवाह के मंगलमय उत्सव का वर्णन आदर के साथ सुनकर गावेंगे, वे लोग श्रीजानकीजी और श्रीरामजी की कृपा से सदा सुख पावेंगे॥।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रामचरित श्रवण-गान की महिमा” प्रकरण का छन्द, दोहा ३६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामचरित के श्रवण-गान से मिलने वाले मंगल और कल्याण का वर्णन है।
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रामचरित श्रवण-गान की महिमा