कबिकुल जीवनु पावन जानी
कबिकुल जीवनु पावन जानी
चौपाई ४, दोहा ३६१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कबिकुल जीवनु पावन जानी। राम सीय जसु मंगल खानी॥ तेहि ते मैं कछु कहा बखानी। करन पुनीत हेतु निज बानी॥ ४ ॥
अर्थ
राम-सीता के यश को कविकुल के जीवन को पवित्र करनेवाला और मंगलों की खान जानकर, इससे मैंने अपनी वाणी को पवित्र करने के लिये कुछ (थोड़ा-सा) बखानकर कहा है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
बारात का अयोध्या लौटना