नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह
नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह
दोहा १९३ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह। हाटक धेनु बसन मनि नृप बिप्रन्ह कहँ दीन्ह॥ १९३ ॥
अर्थ
फिर राजा ने नान्दीमुख श्राद्ध करके सब जातकर्म-संस्कार आदि किये और ब्राह्मणों को सोना, गौ, वस्त्र और मणियों का दान दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का दोहा १९३ है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला