मुनि प्रसाद बलि तात तुम्हारी
मुनि प्रसाद बलि तात तुम्हारी
चौपाई १, दोहा ३५७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मुनि प्रसाद बलि तात तुम्हारी। ईस अनेक करवरें टारी॥ मख रखवारी करि दुहुँ भाईं। गुरु प्रसाद सब बिद्या पाईं॥ १ ॥
अर्थ
हे तात! मैं बलैया लेती हूँ, मुनि की कृपा से ही ईश्वर ने तुम्हारी बहुत-सी बलाओं को टाल दिया। दोनों भाइयों ने यज्ञ की रखवाली करके गुरुजी के प्रसाद से सब विद्याएँ पायीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना