मेघनाद कहुँ पुनि हँकरावा
मेघनाद कहुँ पुनि हँकरावा
चौपाई १, दोहा १८२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मेघनाद कहुँ पुनि हँकरावा। दीन्ही सिख बलु बयरु बढ़ावा॥ जे सुर समर धीर बलवाना। जिन्ह कें लरिबे कर अभिमाना॥ १ ॥
अर्थ
फिर उसने मेघनाद को बुलवाया और सिखा-पढ़ाकर उसके बल और [देवताओं के प्रति] वैरभाव को उत्तेजना दी। [फिर कहा--] हे पुत्र! जो देवता रण में धीर और बलवान् हैं और जिन्हें लड़ने का अभिमान है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार