छुधा छीन बलहीन सुर सहजेहिं मिलिहहिं
छुधा छीन बलहीन सुर सहजेहिं मिलिहहिं
दोहा १८१ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
छुधा छीन बलहीन सुर सहजेहिं मिलिहहिं आइ। तब मारिहउँ कि छाड़िहउँ भली भाँति अपनाइ॥ १८१ ॥
अर्थ
भूख से दुर्बल और बलहीन होकर देवता सहज ही में आ मिलेंगे। तब उनको मैं मार डालूँगा या भली भाँति अपने अधीन करके छोड़ दूँगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का दोहा १८१ है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार