मातु बिबेक अलौकिक तोरें
मातु बिबेक अलौकिक तोरें
चौपाई २, दोहा १५१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मातु बिबेक अलौकिक तोरें। कबहुँ न मिटिहि अनुग्रह मोरें॥ बंदि चरन मनु कहेउ बहोरी। अवर एक बिनती प्रभु मोरी॥ २ ॥
अर्थ
हे माता! मेरी कृपा से तुम्हारा अलौकिक ज्ञान कभी नष्ट न होगा। तब मनु ने भगवान् के चरणों की वन्दना करके फिर कहा-हे प्रभु! मेरी एक विनती और है--।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान