मत्त सहस दस सिंधुर साजे
मत्त सहस दस सिंधुर साजे
चौपाई ४, दोहा ३३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मत्त सहस दस सिंधुर साजे। जिन्हहि देखि दिसिकुंजर लाजे॥ कनक बसन मनि भरि भरि जाना। महिषीं धेनु बस्तु बिधि नाना॥ ४ ॥
अर्थ
दस हजार सजे हुए मतवाले हाथी, जिन्हें देखकर दिशाओं के हाथी भी लजा जाते हैं, गाड़ियों में भर-भरकर सोना, वस्त्र और रत्न (जवाहरात) तथा भैंस, गाय और और भी नाना प्रकार की चीजें दीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह