भरि भरि बसहँ अपार कहारा
भरि भरि बसहँ अपार कहारा
चौपाई ३, दोहा ३३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठईं जनक अनेक सुसारा॥ तुरग लाख रथ सहस पचीसा। सकल सँवारे नख अरु सीसा॥ ३ ॥
अर्थ
अनगिनत बैलों और कहारों पर भर-भरकर (लाद-लादकर) भेजी गयी। साथ ही जनकजी ने अनेक सुन्दर शय्याएँ (पलंग) भेजीं। एक लाख घोड़े और पचीस हजार रथ, सब नख से शिखा तक (ऊपर से नीचे तक) सजाये हुए,
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह