मैं बन दीखि राम प्रभुताई
मैं बन दीखि राम प्रभुताई
चौपाई २, दोहा १०९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मैं बन दीखि राम प्रभुताई। अति भय बिकल न तुम्हहि सुनाई॥ तदपि मलिन मन बोधु न आवा। सो फलु भली भाँति हम पावा॥ २ ॥
अर्थ
मैंने [पिछले जन्म में] वन में श्रीरामचन्द्रजी की प्रभुता देखी थी, परन्तु अत्यन्त भयभीत होने के कारण मैंने वह बात आपको सुनायी नहीं। तो भी मेरे मलिन मन को बोध न हुआ। उसका फल भी मैंने अच्छी तरह पा लिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद