मगन ध्यान रस दंड जुग पुनि

दोहा १११ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

मगन ध्यान रस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह। रघुपति चरित महेस तब हरषित बरनै लीन्ह॥ १११ ॥

अर्थ

शिवजी दो घड़ीतक ध्यान के रस (आनन्द) में डूबे रहे; फिर उन्होंने मन को बाहर खींचा और तब वे प्रसन्न होकर श्रीरघुनाथजी का चरित्र वर्णन करने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का दोहा १११ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
शिव-पार्वती संवाद